बाईपास की लड़ाई में घिरे भाजयुमो जिलाध्यक्ष! पदयात्रा के ऐलान पर संगठन ने थमाया नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब
गौरेला से नागपुर तक पदयात्रा का किया था ऐलान, रायपुर में डिप्टी सीएम और नागपुर में केंद्रीय मंत्री से मिलने की बताई थी योजना
गौरेला। गौरेला-पेंड्रा बाईपास की मांग को लेकर आवाज बुलंद करना भाजयुमो जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ दुबे के लिए संगठनात्मक तौर पर मुश्किल खड़ी करता नजर आ रहा है। गौरेला से नागपुर तक पदयात्रा निकालने के उनके ऐलान के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा संगठन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। संगठन ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट को संगठनात्मक मर्यादा और अनुशासन के विपरीत मानते हुए तीन दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ मामला
मामला सिद्धार्थ दुबे के सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। उन्होंने गौरेला-पेंड्रा बाईपास की मांग को लेकर गौरेला से नागपुर तक पदयात्रा करने की घोषणा की थी। उनकी योजना के मुताबिक पदयात्रा के दौरान रायपुर पहुंचकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात की जानी थी। इसके बाद नागपुर पहुंचकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने गौरेला-पेंड्रा बाईपास को स्वीकृति देने की मांग रखने की बात कही गई थी।
बाईपास की मांग को लेकर इस प्रस्तावित पदयात्रा को क्षेत्र की यातायात समस्या और सड़क सुरक्षा से जोड़कर देखा गया था।
दुर्घटनाओं और भारी वाहनों का उठाया मुद्दा
सिद्धार्थ दुबे की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र में बाईपास के अभाव के कारण पैदा हो रही समस्याओं का उल्लेख किया गया था। भारी वाहनों के शहर के भीतर से गुजरने के कारण यातायात दबाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की बात कही गई।
पदयात्रा के उद्देश्य के रूप में बाईपास निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाना, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, दुर्घटनाओं पर रोक लगाना, क्षेत्र के विकास को गति देना और स्थानीय लोगों को राहत दिलाना बताया गया था।
संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट पर जताई आपत्ति
संगठन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस में सिद्धार्थ दुबे की ओर से 22 अगस्त और 31 अगस्त को फेसबुक पर किए गए पोस्ट और टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने इन पोस्ट को पार्टी संगठन और संगठनात्मक विषयों से संबंधित मानते हुए आपत्ति जताई है।
नोटिस में कहा गया है कि संगठन से संबंधित किसी भी असहमति अथवा विषय को सार्वजनिक मंच पर रखने के बजाय निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत सक्षम पदाधिकारियों के समक्ष रखा जाना चाहिए।
यही वजह है कि संगठन ने सिद्धार्थ दुबे से पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
बाईपास की मांग पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा
गौरेला-पेंड्रा बाईपास की मांग क्षेत्र में लंबे समय से प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। शहर के भीतर से भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यातायात दबाव और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है।
बाईपास को लेकर पहले भी अलग-अलग स्तर पर मांग और सक्रियता सामने आती रही है। ऐसे में भाजयुमो जिलाध्यक्ष की ओर से सीधे पदयात्रा का ऐलान किए जाने और इसके बाद संगठन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने से मामला अब राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अब जवाब और संगठन के अगले कदम पर नजर
फिलहाल पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजर सिद्धार्थ दुबे के लिखित जवाब पर है। संगठन की ओर से उन्हें जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। इसके बाद संगठन उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट होता है या आगे कोई संगठनात्मक कार्रवाई करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
एक तरफ गौरेला-पेंड्रा बाईपास की मांग, दूसरी तरफ संगठनात्मक अनुशासन का सवाल—दोनों मुद्दों के एक साथ सामने आने से जिले की राजनीति में इस मामले ने नई चर्चा छेड़ दी है।
देश और दुनिया की हर बड़ी खबर का तुरंत अपडेट पाने के लिए नोटिफिकेशन ऑन करें।