RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग पर निजी स्कूलों का आंदोलन तेज, 18 अप्रैल को स्कूल बंद का ऐलान
भिलाई/रायपुर, 16 अप्रैल।
छत्तीसगढ़ में राइट टू एजुकेशन (RTE) के अंतर्गत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में वर्षों से वृद्धि नहीं होने के विरोध में निजी स्कूलों का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। Chhattisgarh Private School Management Association के बैनर तले संचालित इस असहयोग आंदोलन को और धार देने के लिए प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
एसोसिएशन द्वारा 14 अप्रैल को आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति तय की गई। इसके तहत पहले से जारी असहयोग आंदोलन के अंतर्गत यह निर्णय लागू किया गया है कि RTE के तहत लॉटरी से चयनित विद्यार्थियों के प्रवेश प्रक्रिया में निजी स्कूल किसी प्रकार का सहयोग नहीं करेंगे।
अब आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 17 अप्रैल को प्रदेशभर के निजी स्कूलों में संचालक और शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे, वहीं 18 अप्रैल को सभी निजी स्कूल एक दिन के लिए पूर्णतः बंद रखे जाएंगे। इस निर्णय से राज्यभर में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 से अब तक RTE के अंतर्गत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान शिक्षा से जुड़ी लागत में लगातार वृद्धि हुई है। वर्तमान व्यवस्था में निजी स्कूलों को प्रति छात्र मिलने वाली राशि वास्तविक खर्च की तुलना में काफी कम है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले वास्तविक व्यय को सार्वजनिक किया जाए, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि का पुनर्निर्धारण किया जा सके। उनका तर्क है कि जब सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र अधिक खर्च किया जा रहा है, तो निजी स्कूलों को भी समान आधार पर भुगतान मिलना चाहिए।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर स्थिति से अवगत करा दिया गया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जा सकता है।
जारीकर्ता
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन