गंभीर मुद्दों पर भी प्रशासन नींद में : मुकेश चंद्राकर,डेढ़ वर्ष बाद भी पार्षद रहित वार्डों में चुनाव नहीं,अफीम खेती का मामला ठंडा बस्ते में,जवाबदेही अभी तक तय नहीं,निजी स्कूलों में काफी किताब बेचने का मामला, कोई गंभीर नहीं
भिलाई नगर। भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने शासन प्रशासन में बैठे जनप्रतिनिधि/ अधिकारियों पर गैर जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सब कुछ जानते हुए भी यह जनप्रतिनिधि और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहते हैं और समय पर कोई भी काम नहीं करते। श्री चंद्राकर ने कहा कि हाल ही में कई ऐसे मुद्दे लोगों के सामने आए जिनसे आमजन प्रभावित होता है। लेकिन इन मुद्दों की ओर देखने का समय भी प्रशासनिक अधिकारियों के पास नहीं है।
भिलाई नगर निगम के 1 वार्ड और रिसाली नगर निगम 02वार्ड में पिछले डेढ़ वर्षो से खाली पड़े वार्डो का जिक्र करते हुए श्री चंद्राकर ने बताया कि कांग्रेस की ओर से कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इस और दिलाया गया, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। ऐसी जानकारी मिली है कि अब इन रिक्त पड़े वार्डों में चुनाव की तैयारी की जा रही है जबकि दोनों नगर निगमों के स्थानीय सरकार के कार्यकाल खत्म होने में अब सिर्फ 7 माह बचे हैं।
संभावना है कि नवंबर माह में दोनों निगमों में चुनाव संपन्न किए जाएं। पार्षदरहित इन वार्डो के लोग पिछले डेढ़ वर्ष से परेशान हैं क्योंकि इन वार्डो में कोई काम नहीं हो रहा, नहीं कोई जवाबदेही लेने को तैयार है। क्या निर्वाचन आयोग की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती ? यहां के कलेक्टर को क्या विधान की जानकारी नहीं है ? फिर यहां डेढ़ वर्ष तक चुनाव क्यों नहीं हुए ?
प्रदेश में हो रही अफीम की खेती का मामला उठाते हुए श्री चंद्राकर ने कहा कि दो-चार आरोपी बनाकर इस गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस खेती के पीछे आखिर कौन लोग थे ?अभी तक किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
आखिर शासन प्रशासन में बैठे जनप्रतिनिधि और अधिकारी इन मुद्दों पर एक्शन क्यों नहीं लेते ? दुर्ग जिले में भारी मात्रा में खपने वाली शराब और गांजा का जिक्र करते हुए श्री चंद्राकर ने कहा कि आखिर इतनी मात्रा में गांजा, शराब पहुंच कैसे जाती है। अधिकारियों की नजर में यह क्यों नहीं आता। जब यह गांजा और शराब अपने ठिकाने पर पहुंच जाते हैं तो पुलिस छापा मारती है और वाहवाही लूटती है।
घटिया साड़ी वितरण से पहले जांच क्यों नहीं ?
श्री चंद्राकर ने कहा कि हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को घटिया गुणवत्ता वाली साड़ी का वितरण किया गया। वितरण से पहले जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इसकी जांच क्यों नहीं ? अब जब मामला सामने आया है तो वह अपना पल्ला झाड़ कर किसी और को बलि का बकरा बना रहे हैं। श्री चंद्राकर ने निजी स्कूलों में काफी किताब बेचने और स्वामी आत्मानंद स्कूलों में 1500 रू शुल्क लिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह सारी जानकारी यहां के जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को है। इसके बावजूद पूरा शासन प्रशासन सोया हुआ है और इनकी इस लापरवाही का नतीजा आम आदमी भुगत रहा है।
कानून व्यवस्था कमजोर हुई
श्री चंद्राकर का कहना है कि कानून व्यवस्था भी कमजोर हुई है। अपराधों में तेजी आई है, चोरी हत्या लूट के मामले बढ़े हैं। घटना होने के बाद पुलिस को इसकी जानकारी होती है। पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है इनके मुखबिर कहां गए पता नहीं, क्योंकि अपराध होने के बाद ही पुलिस जागती है। वहीं दूसरी और पुलिस हर चौक चौराहों पर चालान के नाम पर वसूली करते दिखती है।